अधलिखे कागजों से उड़ती स्याही
थोड़ी सी हाँ थी थोड़ी मनाही
दूरियों के दरमियाँ की ये कहानी
है मेरे लफ़्ज़ों से तुझको सुनानी
आँखों में ओसों की बूंदों का साया
गालों पर गहरी घटा का था छाया
अधरों पर मुस्कान दिल में कसक थी
मेरे सिवा ना किसी को खबर थी
ताज़ी हवा के झोकों सा साथ
डूबते को मिला तेरा हाथ
जीने का मकसद तुझसे मिला था
जिंदगी से मुझको ना कोई गिला था
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