सिरहाने में बिखरी सपनों की तादीर
भरे मन में बसी ईक तस्वीर
तस्सवुर में जिनकी बीती हैं सदियाँ
यादों में उनके भटके हैं गलियां
आँखों तले दबी तपती चिंगारी
करवट बदलकर, होते रतजगे
तन्हाई में है जिनका सहारा
यादों में उनके जीवन गुजारा
फंसे ऊंगलियों में कच्चे से धागे
सहमी सी हिरनी भरती कुलांचे
टहनियों पे छाया ग़म का है साया
देखे बिना उन्हें मन ये भरमाया
हथेली में मसली कच्ची सी कलियाँ
थाली में पूजा की जलती दीपक
प्रभु के पहले थी जिनकी वंदना
ईस जग में उनके बिन, नहीं अब रहना
भरे मन में बसी ईक तस्वीर
तस्सवुर में जिनकी बीती हैं सदियाँ
यादों में उनके भटके हैं गलियां
आँखों तले दबी तपती चिंगारी
करवट बदलकर, होते रतजगे
तन्हाई में है जिनका सहारा
यादों में उनके जीवन गुजारा
फंसे ऊंगलियों में कच्चे से धागे
सहमी सी हिरनी भरती कुलांचे
टहनियों पे छाया ग़म का है साया
देखे बिना उन्हें मन ये भरमाया
हथेली में मसली कच्ची सी कलियाँ
थाली में पूजा की जलती दीपक
प्रभु के पहले थी जिनकी वंदना
ईस जग में उनके बिन, नहीं अब रहना
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