अंतस के क्लेश से
जन्मे कुछ कलुषित विचार
सभ्यता को ललकारते
हुए कुछ घृणित आचार
अट्टहास होता यम का
और लाशों के गिर्द का जश्न
गिद्ध सी मंडराती हुई
भूखी आत्माओं का संग
मानवता को कराहते
हों पाप से पूर्ण लब्ध
और रात को भेदते
कहकहाते कुछ शब्द
सुन सको तो सुनो
उन दर्दों की दास्ताँ
दिल में हो जो छिपे
और माँगे आसमाँ
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